एक नज़र में :
- नए नियमों का नाम Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026 है और ये 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
- डिस्काउंट दिखाने के साथ कंपनी को पुरानी कीमत भी बतानी होगी, और पुरानी कीमत का मतलब है पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत।
- सर्च रिज़ल्ट में हेरफेर, बिना लेबल वाली स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग और प्लेटफॉर्म से बाहर की सेवाओं पर ली जाने वाली बंडल्ड फीस, तीनों पर रोक लगेगी।
Online Shopping New Rules: उपभोक्ता मामले विभाग ने 9 सितंबर 2026 को ऑनलाइन शॉपिंग के नियम बदल दिए हैं, और 1 जनवरी 2027 से ये आपकी हर खरीदारी पर लागू हो जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव उसी कटी हुई कीमत पर हुआ है जो आपको हर सेल में दिखती है, क्योंकि अब छूट के साथ कंपनी को ये भी बताना होगा कि यही सामान पिछले दिनों कितने में बिक रहा था। और पहले वाली कीमत से सरकार का मतलब MRP नहीं है, बल्कि पिछले 30 दिनों का सबसे सस्ता दाम है। सरकार को यहाँ तक इसलिए आना पड़ा, क्योंकि 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर दर्ज हुई 17,71,622 शिकायतों में से 5,11,196 शिकायतें, यानी करीब 29 प्रतिशत, अकेले ई-कॉमर्स से जुड़ी थीं।
हालांकि इस फेस्टिव सेल में आपको ये फर्क नहीं दिखेगा, क्योंकि तब तक पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
डिस्काउंट के अलावा इस नोटिफिकेशन में सर्च रिज़ल्ट, स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग, चेकआउट पर लगने वाली फीस और डार्क पैटर्न को लेकर भी नियम बने हैं, और Amazon, Flipkart, Myntra से लेकर हर छोटी बड़ी शॉपिंग वेबसाइट इनके दायरे में आएगी। आइये जानते हैं कि 1 जनवरी 2027 से आपकी ऑनलाइन शॉपिंग में क्या क्या बदलेगा और इसमें आपके हाथ क्या आएगा।
डिस्काउंट असली है या नकली, अब पिछले 30 दिन तय करेंगे
नोटिफिकेशन में जोड़े गए नियम 4(13) के अनुसार, जब भी कोई प्लेटफॉर्म या सेलर किसी सामान पर कीमत घटाने का ऐलान करेगा, उसे घटी हुई कीमत के साथ उसकी पुरानी कीमत भी दिखानी होगी। इसी नियम में सरकार ने इसकी परिभाषा भी तय कर दी है, जिसके अनुसार पुरानी कीमत वो सबसे कम दाम है जिस पर वो सामान छूट के ऐलान से पहले के 30 दिनों में बेचा गया था।
मतलब, अब आप MRP से नहीं, बल्कि पिछले महीने की असली बिक्री कीमत से तुलना कर पाएंगे। मान लीजिए किसी हेडफोन पर आपको 60 प्रतिशत की छूट दिख रही है और उसके सामने ₹4,999 का MRP कटा हुआ लिखा है, लेकिन पिछले 30 दिनों में वही हेडफोन ₹2,099 में भी बिका है। 2027 से कंपनी को आपके सामने ₹4,999 नहीं, बल्कि वही ₹2,099 वाली कीमत रखनी पड़ेगी, और तब आपको साफ दिख जाएगा कि छूट असल में कितनी है।
चेकआउट पर चुपके से जुड़ने वाली फीस पर रोक
कार्ट में आप कीमत कुछ और देखते हैं, और पेमेंट पेज तक पहुँचते-पहुँचते वो कुछ और हो जाती है। ऑर्डर वहीं छोड़ देने का मन भी करता है, लेकिन तब तक पूरा पता और कार्ड की जानकारी भरी जा चुकी होती है।
नए नियम 5(7) के अनुसार, मार्केटप्लेस कंपनियां अब आपसे उन सेवाओं के लिए बंडल्ड फीस नहीं वसूल सकेंगी जिनका उस शॉपिंग प्लेटफॉर्म से कोई लेना देना नहीं है। हालांकि यहाँ एक बात आपको साफ पता होनी चाहिए, ये हर तरह के चार्ज पर रोक नहीं है। नियम में लॉयल्टी और मेंबरशिप प्रोग्राम को इसके दायरे से बाहर रखा गया है, यानी सालाना मेंबरशिप प्लान और उनसे जुड़े फायदे इस रोक से अलग रहेंगे।

सर्च में सबसे पहले जो दिखे, वो वहाँ क्यों है
नए नियमों में जुड़ा एक हिस्सा कहता है कि कोई भी कंपनी सर्च रिज़ल्ट या सर्च इंडेक्स में इस तरह हेरफेर नहीं कर सकेगी कि आपकी सर्च का नतीजा ही बदल जाए। इसके साथ स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग को अब साफ और सामने दिखने वाले लेबल से अलग पहचान देनी होगी, ताकि आपको पता रहे कि सबसे पहले दिख रहा सामान पैसे देकर वहाँ पहुँचा है या नहीं।
सबसे बड़ी शर्त इसके आगे है। हर मार्केटप्लेस को अपनी रैंकिंग के मुख्य आधार, घटते क्रम में और आसान भाषा में, सबके सामने रखने होंगे। यानी कंपनी अब आपसे ये नहीं छुपा पाएगी कि सामान किस आधार पर ऊपर नीचे लगाया जा रहा है।
डार्क पैटर्न अब गाइडलाइन नहीं, नियम बन गए हैं
डार्क पैटर्न वेबसाइट और ऐप का वो डिज़ाइन है जो आपसे वही करवा ले जो आप करना नहीं चाहते थे। इन पर सरकार ने 30 नवंबर 2023 को ही गाइडलाइन जारी कर दी थी और 13 तरह के डार्क पैटर्न गिनाए थे, लेकिन वो गाइडलाइन ही थी। अब इनका पालन ई-कॉमर्स नियमों का हिस्सा बन गया है, और इसके साथ दो नई शर्तें भी जुड़ी हैं, हर कंपनी को सालाना सेल्फ-ऑडिट करना होगा और उसका सर्टिफिकेट अपनी साइट पर सामने लगाना होगा।
इस सूची में वो तरीके भी हैं जो आपको लगभग हर बार खरीदारी करते वक्त मिल जाते हैं:
- फाल्स अर्जेंसी: प्रोडक्ट के नीचे लाल रंग में “स्टॉक में बस 2 बचे” लिखा दिखता है या एक टाइमर उल्टी गिनती करने लगता है, और आप सोचने से पहले ऑर्डर कर देते हैं। स्टॉक सच में उतना ही कम था। ये आपको कभी पता नहीं चलता।
- बास्केट स्नीकिंग: पेमेंट से ठीक पहले कार्ट में कोई छोटा डोनेशन या कोई एक्स्ट्रा सामान अपने आप जुड़ जाता है, और आपसे पूछा तक नहीं जाता।
- ड्रिप प्राइसिंग: लिस्टिंग पर कीमत कुछ और रहती है और कुछ चार्ज आखिरी पेज पर आकर जुड़ते हैं, यानी असली दाम आपको सबसे बाद में पता चलता है।
- कन्फर्म शेमिंग: मना करने वाला बटन ऐसी भाषा में लिखा जाता है कि मना करते हुए भी आपको बुरा लगे, जैसे “नहीं, मुझे बचत नहीं चाहिए”।
- सब्सक्रिप्शन ट्रैप: सब्सक्रिप्शन दो क्लिक में चालू हो जाता है, लेकिन उसे बंद करने का विकल्प ढूंढने में आपका आधा घंटा निकल जाता है।
चार हक जो इसी नोटिफिकेशन में आपको मिले हैं
डिस्काउंट वाला नियम सबसे बड़ा ज़रूर है, लेकिन इसी नोटिफिकेशन में आपके काम की चार और चीज़ें भी रखी गई हैं:
- अपनी शिकायत की कॉपी अब आपको मिलेगी। शिकायत अधिकारी को 48 घंटे के अंदर आपकी शिकायत मिलने की पुष्टि करनी होगी, उसने जो शिकायत दर्ज की है उसकी वही कॉपी आपको देनी होगी, और एक महीने के अंदर उसका निपटारा करना होगा।
- सेलर का पूरा पता आप मांग सकेंगे। सामान खरीदने के बाद अगर आप लिखित में मांगें, तो मार्केटप्लेस को आपको उस सेलर का पता, वेबसाइट और ई-मेल देना होगा, ताकि विवाद की हालत में आप सीधे उससे बात कर सकें।
- बिल पर सेलर का नाम बराबरी से लिखा होगा। बिल में सेलर का नाम उतने ही बड़े फॉन्ट में लिखना होगा जितने बड़े में उस शॉपिंग कंपनी का अपना नाम लिखा होता है।
- आपके डेटा से कंपनी अपना ब्रांड नहीं बेच सकेगी। मार्केटप्लेस आपकी जानकारी का इस्तेमाल अपने ही नाम या ब्रांड वाला सामान बेचने के लिए, या किसी सेलर को अपना बताकर दिखाने के लिए, आपकी साफ मंज़ूरी के बिना नहीं कर सकेगा।
इसके अलावा हर ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से जुड़ना होगा, यानी हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई आपकी शिकायत सीधे उस कंपनी तक पहुँचेगी।
Online Shopping New Rules: पुराने और नए नियमों में क्या फर्क पड़ेगा
| क्या बदल रहा है | अभी क्या होता है | 1 जनवरी 2027 से |
|---|---|---|
| डिस्काउंट | कटी हुई कीमत अक्सर MRP होती है | पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत दिखानी होगी |
| स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग | लेबल छोटा या गायब | साफ और सामने दिखने वाला लेबल ज़रूरी |
| सर्च रिज़ल्ट | रैंकिंग का आधार सार्वजनिक नहीं | मुख्य आधार घटते क्रम में, आसान भाषा में बताने होंगे |
| एक्स्ट्रा फीस | बंडल्ड फीस पर कोई साफ रोक नहीं | प्लेटफॉर्म से बाहर की सेवाओं की बंडल्ड फीस नहीं |
| डार्क पैटर्न | 2023 की गाइडलाइन | नियम, साथ में सालाना ऑडिट और सर्टिफिकेट |
| शिकायत | जवाब का तय ढांचा सीमित | 48 घंटे में पुष्टि, शिकायत की कॉपी, एक महीने में निपटारा |
| सेलर की जानकारी | सीमित जानकारी | खरीद के बाद लिखित मांग पर पूरा पता और संपर्क |
तो इस फेस्टिव सेल में आपको क्या करना चाहिए
ये पूरा नोटिफिकेशन 1 जनवरी 2027 से लागू होगा, यानी सितंबर और अक्टूबर की इस फेस्टिव सेल पर अब भी पुराने नियम ही चलेंगे। 30 दिन वाली ये तुलना कंपनियां इस बार आपको लिखकर नहीं देंगी, इसलिए फिलहाल ये काम आपको खुद करना होगा। जो सामान आप सेल में लेने की सोच रहे हैं, उसे अभी से कार्ट या विशलिस्ट में डालकर उसकी कीमत पर नज़र रख लीजिए, और सेल वाले दिन उसी कीमत से तुलना कीजिए, MRP से नहीं।
हाँ, अगर इस बीच किसी ऑर्डर में आपके साथ गड़बड़ हो जाए, तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का नंबर 1915 है, और शिकायत दर्ज कराने की ये सुविधा आपको अभी भी मिलती है।
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