सोमवार रात करीब 8 बजे कई लोगों का WhatsApp अचानक काम करना बंद कर दिया। स्क्रीन पर एक ही लाइन थी, “Account in review”, और नीचे लिखा था कि अकाउंट की गतिविधि और डिवाइस की जानकारी जांची जा रही है, और नतीजा आम तौर पर 24 घंटे में बता दिया जाएगा। इस दौरान ऐप का कोई फीचर नहीं चलता। भारत के यूज़र्स भी इसमें शामिल थे, और किसी को पहले से कोई चेतावनी नहीं मिली।
कंपनी ने इस पर जो कहा, वो इस पूरे मामले की सबसे अहम बात है। WhatsApp के प्रवक्ता के अनुसार, “हम लगातार उन लोगों से आगे रहने की कोशिश करते हैं जो हमारी सर्विस का गलत इस्तेमाल करते हैं, और बाकी यूज़र्स को सुरक्षित रखने के लिए अकाउंट बैन करते हैं। कभी-कभी इसमें हमसे गलती हो जाती है, और अगर ऐसा होता है तो हम उसे जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश करते हैं।” कंपनी ने ये भी बताया है कि प्रभावित अकाउंट बहाल करने के लिए कदम उठाए जा चुके हैं।
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असल सवाल यही है। जब कंपनी खुद मान रही है कि उसका फैसला गलत हो सकता है, तो सज़ा पहले और जांच बाद में क्यों होती है? WhatsApp ने अब तक नहीं बताया है कि गड़बड़ी की वजह क्या थी, कितने लोग प्रभावित हुए, या किन देशों में असर पड़ा। जिन यूज़र्स ने अपील की, उन्हें भी वही 24 घंटे वाला सामान्य जवाब मिलता रहा।
भारत में ये बात और भारी पड़ती है। यहां WhatsApp सिर्फ बातचीत का ज़रिया नहीं है। बैंक के मैसेज, स्कूल के ग्रुप, दुकान के ऑर्डर और दफ्तर की पूरी बातचीत इसी पर चलती है। 24 घंटे का ब्लॉक किसी के लिए थोड़ी असुविधा है, और किसी के लिए पूरे एक दिन का कारोबार।
हमारे अनुसार असली दिक़्क़त बैन नहीं है, स्पैम और गलत इस्तेमाल रोकना कंपनी का काम ही है। दिक़्क़त ये है कि गलती कंपनी के सिस्टम की हो और इंतज़ार यूज़र करे, वो भी ये जाने बिना कि उसने किया क्या था। 3 अरब से ज़्यादा लोग जिस ऐप पर टिके हैं, वहां “कभी-कभी गलती हो जाती है” कहकर आगे बढ़ जाना काफी नहीं है।

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