50 करोड़ मोबाइल फोन कनेक्शन मतलब भारत के लगभग आधे सिम कार्ड यूजर को KYC से जुडी नयी समस्या सामने आ सकती है। कुछ दिन पहले प्राइवेट कंपनियों द्वारा आधार कार्ड की प्राइवेट डिटेल्स को ना इस्तेमाल करने वाली सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह समस्या एक बढ़ा रूप ले सकती है। (Read in English)

इस समस्या के तहत यूजर का सिम कार्ड वेरिफिकेशन में विफल होने पर डिसकनेक्ट भी किये जा सकते है। इस परेशानी से बचाव का कोई तरीका निकलने के लिए सरकार से भी उच्च-स्तरिय बातचीत भी की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

 जैसा ऊपर आपको बताया गया है की सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले फैसला दिया तथा की प्राइवेट कंपनिया, किसी भी तरह के वेरिफिकेशन के लिए UDI मतलब आधार कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर सकते है। फोन कनेक्शन या बैंक खातों को अब आधार से लिंक कराने की जरूरत नहीं है। प्राइवेट कंपनियां यूजर्स से इसकी मांग भी नहीं कर सकती हैं। इस मुद्दे पर सरकार में उच्च स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है, क्योंकि अगर बड़ी संख्या में मोबाइल नंबर्स को डिसकनेक्ट किया जाता है तो नागरिकों के ऊपर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

आधार कार्ड से जुडी इस खबर का सबसे ज्यादा असर Reliance Jio के उपभोक्तओं पर पड़ने वाला है क्योकि कंपनी ने 2016 में जिओ के रूप में टेलिकॉम इंडस्ट्री में कदम रखते ही नए सिम के लिए सिर्फ बायोमेट्रिक का ही सहारा लिया था, जबकि अन्य कंपनियों ने काफी कम संख्या में सिर्फ आधार कार्ड के जरिये ही आईएम कार्ड जरी करे है।

बुधवार को टेलिकॉम सेक्रेटरी अरुणा सुंदरराजन ने मोबाइल कंपनियों से मुलाकात की। इस मीटिंग में केवाईसी से एक दूसरे विकल्प पर बातचीत हुई, जिससे इस परेशानी का कोई हल निकाला जा सके। टेलिकॉम डिपार्टमेंट भी इस बारे में यूनीक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहा है।

तो करना होगा दोबारा KYC?

सुन्दरराजन जी ने बताया है की सरकार इस मुद्दे को काफी गंभीरता से ले रही है और जल्द ही कोई हल निकला जायेगा। उन्होंने यह भी बताया है की अगर नयी KYC प्रक्रिया की जरूरत महसूस होती है तो यह काफी सरल और आरण रहेगी ताकि यूजर को किसी भी तरह की कोई परेशानी ना हो।

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