Suzuki Access 125 पिछले एक दशक से भारत की सबसे पसंदीदा स्कूटरों में से एक रही है। पिछले साल Suzuki ने इसी भरोसेमंद ‘Access’ नाम को इलेक्ट्रिक रूप दिया और सामने आई Suzuki e-Access, एक 3kWh बैटरी वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर। इसके साथ कंपनी Access की विरासत को इलेक्ट्रिक दौर में भी आगे ले जाना चाहती है। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या Suzuki ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ सही कदम लिया है? हमारी पहली राइड के बाद जवाब है, ज़्यादातर मामलों में हां। आइये इसके बारे में आपके जो भी सवाल होंगे, उन्हें इस रिव्यू में जानने की कोशिश करते हैं।

Suzuki e-Access: कीमत और ज़रूरी बातें
Suzuki e-Access एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर है। दिल्ली में इसकी कीमत ₹1,94,526 (ऑन-रोड, दिल्ली) है।
इस कीमत पर ये भारत में बिकने वाले कई पेट्रोल स्कूटरों से तो काफी महंगी पड़ती ही है, साथ ही Ather 450 और Vida VX2 Plus जैसे इलेक्ट्रिक विकल्पों से भी महंगी है।
क्या अच्छा है
- अच्छा स्लीक डिज़ाइन
- ढेरों फीचर्स
- आगे की तरफ अच्छी-खासी स्टोरेज
- स्मूद और लीनियर परफॉर्मेंस
क्या कमी है
- इलेक्ट्रिक वाला झटकेदार ‘इंस्टेंट पुल’ यहां नहीं मिलता
- चलते-चलते राइड मोड नहीं बदल सकते
- ब्रेकिंग शुरुआत में बहुत अचानक महसूस होती है
- कीमत के हिसाब से रेंज कम है
Suzuki e-Access रिव्यू: कुछ अलग करने की कोशिश
Suzuki ने यहां पुराने तरीके को बिल्कुल किनारे कर दिया है, और ये दांव काफी हद तक काम करता है। e-Access अपने पेट्रोल वर्ज़न की तरह भारी-भरकम नहीं दिखती। इसके बजाय इसका लुक स्लीक और स्टाइलिश है, जो साफ बता देता है कि ये एक इलेक्ट्रिक स्कूटर है। सबसे अलग दिखने वाला हिस्सा है इसका फ्रंट, जिसमें डबल-लेयर डिज़ाइन दिया गया है, जिसे आप ‘डक-बिल’ यानी बत्तख की चोंच जैसा फेस कह सकते हैं। ये डिज़ाइन हर किसी को पसंद आए, ये ज़रूरी नहीं, लेकिन इतना तय है कि ये अनोखा है और e-Access को अपनी एक अलग पहचान देता है।

तस्वीरों में e-Access थोड़ी अटपटी लग सकती है, मानो Suzuki अलग दिखने की ज़रूरत से ज़्यादा कोशिश कर रहा हो। लेकिन सामने देखने पर ये आंखों को बुरी नहीं लगती और हर चीज़ अपनी सही जगह बैठी लगती है। लाइन्स ज़्यादा सोच-समझकर खींची हुई लगती हैं, बनावट ज़्यादा संतुलित दिखती है, और तस्वीरों के मुकाबले स्कूटर का पूरा अंदाज़ कहीं ज़्यादा जमा हुआ और भरोसेमंद महसूस होता है। आप इसे पसंद करें या इसकी आदत डालनी पड़े, इस बात से इनकार नहीं कि ये बाकी स्कूटरों से सच में थोड़ी अलग दिखती है। अपना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर उतार रहे किसी ब्रांड के लिए ये शुरुआत बिल्कुल बुरी नहीं है।

Suzuki e-Access बैटरी और पॉवरट्रेन रिव्यू: न ज़्यादा, न कम!
बैटरी और रेंज शायद वो जगह है जहां e-Access हर किसी को समझ नहीं आएगी। भारत के इलेक्ट्रिक स्कूटर बाज़ार में ज़्यादातर Nickel Cobalt Manganese (NCM) बैटरियों का बोलबाला है, लेकिन Suzuki ने e-Access के लिए Lithium Ferrous Phosphate (LFP) बैटरी चुनी है। ये एक बड़ा इंजीनियरिंग फैसला है, जिसका असल असर खरीदार पर पड़ता है। LFP बैटरियां ज़्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं और इनकी उम्र भी लंबी होती है। लेकिन इनमें NCM बैटरियों जैसी एनर्जी डेंसिटी नहीं होती।
इसका असल मतलब ये है कि e-Access में 3kWh की बैटरी तो है, पर रेंज सिर्फ 95 किलोमीटर मिलती है। ये उतनी ही साइज़ की NCM बैटरी वाले स्कूटर से करीब 20 प्रतिशत कम है। जिस सेगमेंट में बाकी कंपनियां अक्सर 110 से 130km की रेंज का दावा करती हैं, वहां ये फर्क साफ दिखता है और शोरूम पर शायद यही पहली बात होगी जो ग्राहक उठाएंगे। टेस्टिंग के दौरान मैंने एक बार इसकी बैटरी पूरी खत्म होने तक चलाई, और ‘Eco’ मोड का इस्तेमाल किए बिना भी ये करीब 90 किलोमीटर चली।

चार्जिंग की बात करें तो Suzuki इसके साथ 600 वॉट का पोर्टेबल चार्जर देती है, जो बैटरी को ज़ीरो से फुल करने में करीब 6.5 घंटे लेता है, यानी एक पूरी रात की चार्जिंग। ज़्यादा दिलचस्प विकल्प है फास्ट चार्जर, जिसे Suzuki के अनुसार उसके सभी डीलरशिप पर लगाया जाएगा। ये बैटरी को सिर्फ 2 घंटे 12 मिनट में फुल कर देगा। अगर Suzuki अपने इस वादे पर खरी उतरती है, तो उन रोज़ाना सफर करने वालों के लिए रेंज की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी, जो सर्विस विज़िट के दौरान या डीलरशिप के पास कोई काम निपटाते हुए स्कूटर टॉप-अप कर सकते हैं।
e-Access के साथ मेरा वक्त कुछ ही दिनों और अपने इलाके तक सीमित रहा। ये एक अच्छी स्कूटर है और इसमें काफी दम है। e-Access बेहद हल्की और संभालने में आसान है। शहर के ट्रैफिक में बीच से रास्ता बनाते वक्त कभी नहीं लगा कि स्कूटर भारी या बेकाबू है, ये हर छोटी जगह में आसानी से समा जाती है। वज़न अच्छी तरह बंटा हुआ है और दिशा बदलने में ज़रा भी मुश्किल नहीं होती। ये शांत और आरामदायक सिटी राइडिंग के लिए ट्यून की गई है, और यही काम ये बखूबी करती है।

पावर डिलीवरी प्रोग्रेसिव है। पेट्रोल स्कूटर से आ रहे किसी राइडर को इलेक्ट्रिक मोटर के इंस्टेंट टॉर्क की वजह से ये शुरुआत में थोड़ी झटकेदार लग सकती है, लेकिन इसके अलावा ये काफी फुर्तीली है और स्टार्ट से ही तेज़ी पकड़ती है। हालांकि दूसरे इलेक्ट्रिक स्कूटरों के मुकाबले यहां शुरुआत में मिलने वाला टॉर्क का झोंका कहीं ज़्यादा सॉफ्ट है। Suzuki ने रोमांच के बजाय स्मूदनेस और भरोसे को प्राथमिकता दी है।
इसकी सीट का कम्फर्ट भी अच्छा है। राइडिंग पोज़िशन न्यूट्रल और आरामदायक है, और सीट खुद भी अच्छी तरह कुशन की हुई है। सीट चौड़ी है, लेकिन मुझे लगा कि कुछ लोगों के लिए ये सीट उतनी चौड़ी नहीं होगी, और ये किसी भी ग्राहक के खरीदते समय उसके अनुसार एक बड़ी बात साबित हो सकती है। सस्पेंशन का आराम भी ठीक-ठाक है। ये बाज़ार का सबसे बढ़िया सस्पेंशन तो नहीं, लेकिन अपना काम अच्छे से करता है और 20km से लंबी राइड पर भी असहज नहीं लगता। ब्रेकिंग भी अच्छी है। ब्रेक काफी पावरफुल हैं, पर ब्रेकिंग एकदम अचानक होती है और इनकी आदत पड़ने में दो-तीन दिन लग जाते हैं, क्योंकि पहली बार ये आपको कुछ ज़्यादा ही सेंसिटिव लगेंगे।

e-Access के राइड मोड स्ट्रक्चर को Suzuki ने साफ तौर पर सोच समझ कर दिया है। Eco मोड टॉप स्पीड को 55kph तक सीमित कर देता है, फिर भी सिटी राइडिंग के लिए ये पूरी तरह काम का रहता है, जबकि Ride A और Ride B ज़्यादा परफॉर्मेंस खोल देते हैं। ये तीनों मोड हर तरह के यूज़र के लिए काफी हैं और अच्छे से काम करते हैं। यहां अजीब बात ये है कि आप चलते-चलते Eco से Ride A या Ride B पर तो जा सकते हैं, लेकिन Ride A और Ride B के बीच चलते हुए स्विच नहीं कर सकते। मोड बदलने के लिए आपको रुकना पड़ता है, चुनाव करना पड़ता है और फिर दोबारा चलना पड़ता है। Suzuki का तर्क है कि दोनों मोड में रीजनरेटिव ब्रेकिंग का फर्क राइडर को बीच राइड में चौंका सकता है। सेफ्टी के लिहाज़ से ये बात सही है, पर सच कहूं तो मुझे Ride A और Ride B के बीच रीजन ब्रेकिंग में कोई खास फर्क महसूस नहीं हुआ।
Suzuki e-Access फीचर्स और कम्फर्ट रिव्यू: लगभग सब कुछ मौजूद
फीचर्स की बात करें तो Suzuki e-Access अपने सेगमेंट के हिसाब से एक ठीक-ठाक पैकेज लेकर आती है। आपको स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ 4.2-इंच का TFT कलर डिस्प्ले, तीन राइडिंग मोड (Eco, Ride A और Ride B) और एक USB चार्जिंग पोर्ट मिलता है, जो अब इस क्लास में आम बात हो चुकी है। इस्तेमाल में इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर ब्राइट और अच्छे से सजा हुआ है, हालांकि डिस्प्ले के चारों ओर बेज़ल थोड़े मोटे हैं, पर ये कोई डील-ब्रेकर नहीं है।

एक फीचर ने मुझे सच में प्रभावित किया, और वो है इसकी सेल्फ-सपोर्टिंग सीट, जो बूट के ढक्कन का काम करती है। नई Bajaj Chetak की तरह, Suzuki e-Access की सीट को आप जिस पोज़िशन पर खुला छोड़ देंगे, बूट इस्तेमाल करते वक्त वो वहीं टिकी रहती है, उसे पकड़े रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती। बात छोटी है, लेकिन जब आपके हाथ ग्रोसरी के बैग या हेलमेट से भरे हों, तो इस तरह की सोची-समझी डिटेल असल ज़िंदगी में बहुत काम आती है।

जहां e-Access खुद को कमज़ोर साबित करती है, वो है इसका बूट स्पेस। सीट के नीचे की स्टोरेज सिर्फ 17 लीटर है। इतनी कि इसमें एक फुल-साइज़ हेलमेट भी नहीं समाता। ये इतना कम है कि इस सेगमेंट के ज़्यादातर मुकाबलों से लगभग आधा है। बात को और साफ करूं तो पेट्रोल वाली Access 125 तक का बूट अपनी इस इलेक्ट्रिक एक्सेस वर्ज़न से बड़ा है। एक ऐसी स्कूटर के लिए, जिसे एक प्रैक्टिकल प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया गया है, ये एक बड़ी कमी है, जिसे Suzuki को आगे के मॉडलों के लिए ठीक करना होगा।
रिव्यू वर्डिक्ट: क्या आपको Suzuki e-Access खरीदनी चाहिए?


Smartprix रेटिंग: ⭐6.5/10
- डिज़ाइन और बिल्ड: ⭐6/10
- फीचर्स और टेक: ⭐7/10
- राइडिंग का मज़ा: ⭐7/10
- परफॉर्मेंस: ⭐6.5/10
- कम्फर्ट और स्पेस: ⭐7/10
तो ये था किसी स्कूटर का मेरा पहला रिव्यू। Suzuki e-Access एक बहुत अच्छा और प्रैक्टिकल इलेक्ट्रिक स्कूटर है। अपनी पहली गाड़ी खरीदने वालों या स्टूडेंट्स के लिए ये एक काफी समझदारी भरा विकल्प है। राइड मोड बदलने का तरीका थोड़ा उलझाने वाला है, डिज़ाइन हर किसी को नहीं भाएगा, और रेंज भी कुछ कमज़ोर लगती है।
लेकिन जहां ये सही बैठती है, वो है इसकी इस्तेमाल में आसानी, कम्फर्ट और इसकी लीनियर पावर डिलीवरी। और हां, इसमें वो सब फीचर्स मिल जाते हैं जो किसी स्कूटर में कोई मांग सकता है, कीलेस स्टार्ट/स्टॉप से लेकर USB पोर्ट तक, और यहां तक कि एक डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी, जो नेविगेशन तक सपोर्ट करता है। फिर भी, ₹1.8 लाख (एक्स-शोरूम) की कीमत पर Suzuki e-Access को सुझाना आसान नहीं, क्योंकि Ather और Vida जैसे ब्रांड इतनी ही साइज़ की स्कूटर इससे काफी कम कीमत पर दे रहे हैं।


































