Apple के दीवानों के लिए एक बड़ी खबर है। कंपनी के CEO Tim Cook ने खुलकर मान लिया है कि अब iPhone, Mac और iPad के दाम बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। यानी इस सितंबर आने वाला iPhone 18, खासकर इसका Pro मॉडल, पिछली बार के मुकाबले काफ़ी महंगा हो सकता है। अगर आप इस साल नया iPhone या MacBook लेने की सोच रहे हैं, तो यह समझना आपके काम का है कि दाम आख़िर बढ़ क्यों रहे हैं और कितने तक जा सकते हैं। आइए पूरी बात विस्तार से समझते हैं।
Tim Cook ने आख़िर कहा क्या
The Wall Street Journal को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में (पत्रकार Nicole Nguyen और Rolfe Winkler के साथ) Tim Cook ने कहा, “दुर्भाग्य से, कीमतों में बढ़ोतरी अब अनिवार्य है।” उन्होंने बताया कि Apple लंबे समय से बढ़ती लागत को खुद झेलकर अपने ग्राहकों को इस मार से बचाती आ रही थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि यह “टिकाऊ नहीं रह गया।” सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी अब यह बोझ अकेले नहीं उठा सकती।
दाम बढ़ने की असली वजह, मेमोरी चिप का संकट
इस पूरे मामले की जड़ में है मेमोरी और स्टोरेज चिप्स (DRAM और NAND) की दुनिया भर में किल्लत। Microsoft, Google, Meta, Amazon और OpenAI जैसी कंपनियां अपने AI डेटा सेंटर्स के लिए धड़ल्ले से ये चिप्स खरीद रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में बनने वाली कुल मेमोरी चिप्स का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अब इन्हीं AI सर्वरों में जा रहा है, जिससे आम कंज्यूमर डिवाइस के लिए सप्लाई कम पड़ रही है।
नतीजा यह कि पिछले एक साल में इन चिप्स के दाम करीब चार गुना तक चढ़ गए हैं। Tim Cook ने इस हालात को “सौ साल में एक बार आने वाली बाढ़” जैसा बताया, यानी एक ऐसा संकट जो रोज़मर्रा का नहीं है।

iPhone 18 Pro कितना महंगा हो सकता है
यहीं पर असली झटका छिपा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone 17 Pro में जो मेमोरी और स्टोरेज चिप्स Apple को करीब $50 की पड़ती थीं, iPhone 18 Pro में उन्हीं की लागत बढ़कर करीब $200 तक पहुंच सकती है। चिप दर चिप देखें तो तस्वीर और साफ़ हो जाती है:
- 12GB DRAM: पहले करीब $39, अब करीब $145
- 256GB फ्लैश स्टोरेज: पहले करीब $13, अब करीब $51
रिसर्च फर्म TechInsights का कहना है कि अगर Apple अपना सामान्य मुनाफ़ा (gross margin) बनाए रखना चाहे, तो उसे iPhone Pro मॉडल की कीमत में करीब $270 जोड़ने पड़ेंगे, जिससे शुरुआती कीमत करीब $1,371 तक पहुंच जाती है। हालांकि माना जा रहा है कि Apple मार्जिन थोड़ा घटाकर (करीब 44 प्रतिशत पर) इसे $1,299 के आसपास रख सकती है। तुलना के लिए, मौजूदा iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत $1,099 है।
महंगा होने की दूसरी वजह, iPhone 18 Pro के बड़े अपग्रेड

कीमत सिर्फ़ चिप संकट की वजह से नहीं बढ़ रही। लीक और रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone 18 Pro में कई बड़े हार्डवेयर अपग्रेड आ रहे हैं, जो खुद इसकी लागत बढ़ा रहे हैं:
- 48MP का बड़ा मेन सेंसर वैरिएबल अपर्चर के साथ, जो किसी iPhone में पहली बार मिल सकता है
- 2nm चिप (कथित A20 Pro), जो ज़्यादा पावर-एफिशिएंट बताई जा रही है
- तेज़ रफ़्तार वाली हाई-स्पीड मेमोरी
- पहले से काफ़ी बड़ी बैटरी
इन प्रीमियम अपग्रेड्स और महंगी मेमोरी, दोनों ने मिलकर Pro मॉडल की कुल लागत को ऊपर धकेल दिया है। ध्यान रहे, ये स्पेसिफिकेशन अभी कंपनी ने कन्फर्म नहीं किए हैं, ये सप्लाई चेन और लीक पर आधारित हैं।
क्या बेस iPhone 18 भी बच नहीं पाएगा
कुछ समय पहले खबरें थीं कि बेस iPhone 18 में RAM को 8GB से बढ़ाकर 12GB किया जा सकता है, ताकि ऑन-डिवाइस AI फीचर्स बेहतर चलें, और वो भी बिना कीमत बढ़ाए। लेकिन अब जब Tim Cook ने पूरी लाइनअप पर लागत बढ़ने की बात मान ली है, तो यह उम्मीद कमज़ोर पड़ती दिख रही है। यानी सिर्फ़ Pro ही नहीं, नॉन-Pro मॉडल भी इस बढ़ोतरी का हिस्सा बन सकते हैं।
सिर्फ़ iPhone नहीं, Mac और iPad पर भी असर
यह मामला अकेले iPhone तक सीमित नहीं है। Cook ने साफ़ कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी Apple के पूरे प्रोडक्ट लाइनअप पर लागू होगी। इसकी झलक पहले ही दिख चुकी है, कंपनी Mac mini की कीमत $599 से बढ़ाकर $799 कर चुकी है। आने वाले समय में iPad और बाकी Mac मॉडल भी महंगे हो सकते हैं।
भारत के खरीदारों के लिए क्या मायने

भारत के लिहाज़ से यह खबर और भी अहम हो जाती है। iPhone 18 सीरीज़ सितंबर 2026 में आने की उम्मीद है, ठीक उसी वक्त जब देश में त्योहारी खरीदारी अपने चरम पर होती है। पहले अनुमान था कि iPhone 18 Pro Max की भारत में कीमत ₹1,49,900 के आसपास रह सकती है। लेकिन Cook के इस बयान के बाद यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है। यानी जो लोग दिवाली के आसपास नया iPhone लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें इस बार थोड़ा बड़ा बजट रखना पड़ सकता है।
Apple आगे क्या करेगी
Cook ने यह भी बताया कि कंपनी इस संकट को कम करने में मदद के लिए अपनी बैलेंस शीट का इस्तेमाल करने को तैयार है, ताकि मेमोरी सप्लाई बढ़ाई जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी साफ़ किया कि Apple की अपनी मेमोरी फैक्ट्री लगाने की कोई योजना नहीं है। कुल मिलाकर कंपनी का कहना है कि अपने बड़े मुनाफ़े को बनाए रखने के लिए ये बढ़ोतरी ज़रूरी है, और फ़िलहाल यह बोझ आख़िरकार ग्राहकों तक पहुंचता दिख रहा है।

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