एक नज़र में:
- क्या हुआ: राष्ट्रपति ने 17 अगस्त को उस संशोधन को मंज़ूरी दी, जो UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर शुल्क का रास्ता खोलता है
- आप पर असर: फिलहाल शून्य। ग्राहक के लिए UPI मुफ्त है, और एक व्यक्ति से दूसरे को भेजा पैसा इससे बाहर रहेगा
- आगे क्या: दर, सीमा और तारीख, तीनों NPCI की अगुवाई वाली UPI एंड सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी तय करेगी
UPI पर चार्ज (UPI charges 2026) की बहस अब कागज़ी नहीं रही। कानून मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने 17 अगस्त को कराधान और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 का संशोधन, दोनों को मंज़ूरी दे दी है। संसद ने इन्हें 10 अगस्त को पास किया था।
आपके फोन में आज कुछ नहीं बदला है। बदला है सिर्फ एक कानूनी ताला, जिसे सरकार अब अपनी अधिसूचना से कभी भी खोल सकती है।
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कानून में बदला सिर्फ इतना
धारा 10A बैंकों और पेमेंट कंपनियों को उन माध्यमों पर शुल्क लेने से रोकती थी, जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269SU के तहत तय थे। संशोधन ने उस संदर्भ की जगह लिख दिया है, “एक या अधिक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम, जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचना से तय करे।” मतलब, अब ये सूची कानून नहीं, सरकार बनाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार ये सक्षम प्रावधान UPI यूज़र्स पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगाता, और MDR का ढाँचा अभी तय नहीं हुआ है।

आपकी जेब पर असर कितना
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वो हिस्सा है, जो बैंक और पेमेंट कंपनी दुकानदार को मिलने वाली रकम से काटती हैं, ग्राहक की जेब से नहीं। वित्त मंत्रालय के अनुसार MDR आया भी, तो एक तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा दुकानदारों पर ही लगेगा, और दर डेबिट कार्ड के 0.90% से भी कम रहेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार दुकानों पर ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.25% से 0.4% की बात चल रही है, यानी ₹2,500 के बिल पर ये रकम ₹6 से ₹10 के बीच बैठती है। छोटे दुकानदारों पर सीतारमण साफ रही हैं, “हम उन पर कोई MDR नहीं लगाने जा रहे।”
हमारे अनुसार, असली सवाल का जवाब कानून में नहीं है
जुलाई 2026 में UPI पर 23.66 अरब लेनदेन हुए, ₹29.88 लाख करोड़ के। इतने बड़े ढाँचे का खर्च कोई न उठाए, ये उम्मीद भी ठीक नहीं, और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा भी यही कह चुके हैं।
लेकिन शुल्क दुकानदार पर लगने का मतलब ये नहीं कि वो वहीं रुक जाएगा। महीने का ₹3,000 का राशन उठाकर आप QR स्कैन करने जाएं और आगे से कैश मांग लिया जाए, तो पेमेंट वहीं अटक जाता है। दूसरी तरफ कार्ड पर MDR सालों से लग रहा है, और ज़्यादातर दुकानदार उसे ग्राहक पर नहीं डालते।
खटकने वाली बात यही है कि दर, अधिकतम कटौती और लागू होने की तारीख, तीनों में से एक भी इस अधिनियम में दर्ज नहीं है। सब एक कमेटी पर छोड़ दिया गया है, और असली खबर उस दिन बनेगी, जिस दिन पहली अधिसूचना निकलेगी।

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