Budget 2018: मोबाइल फ़ोन आयात पर सीमा शुल्क में हुई 5 प्रतिशत की वृद्धि

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भारत में मोबाइल फ़ोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने स्मार्टफोन इम्पोर्ट करने पर कस्टम शुल्क में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसका मतलब है अगले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2018) की शुरुआत से इम्पोर्ट किये गये मोबाइल फ़ोनों 20 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी लगेगी। इसका सीधा असर आपको एप्पल के नए आईफोनओ और Google के पिक्सेल फोन पर देखने को मिल सकता है | (Read in English)

भारत सरकार ने अभी कुछ हफ्ते पहले ही (दिसंबर 2017 में) सीमा शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषण की थी और अब बजट-2018 में फिर से ड्यूटी को बढ़ा कर 20 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम भारत में मोबाइल फ़ोन मैन्युफैक्चरिंग को प्रोह्त्साहित करेगा। 2017 में भारत ने 42 अरब डॉलर मूल्य के दूरसंचार उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान आयात किए है और सरकार ने तेजी से आगे बढ़ने वाली इस संख्या को कम करने की कोशिश करनी शुरू भी कर दी है।

मुख्य विचार

  • मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • टीवी पर सीमा शुल्क भी बढ़ाया गया है।
  • स्मार्टवॉच पर सीमा शुल्क को बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है
  • दिसंबर 2017 में, सीमा शुल्क में 10 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।
  • नीति परिवर्तन का उद्देश्य भारत में विनिर्माण को प्रोत्साहित करना है।
  • ऐप्पल फ़ोन अधिकतम भार सहन करेंगे। 88 फीसदी आईफोन भारत में आयात किए जाते हैं
  • आईफोन की कीमतों में रु 2000 से 3000 रुपये की वृद्धि होने की उम्मीद है।

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अब तक, अधिकांश निर्माताओं द्वारा पहले से ही भारत में फोनों की असेम्बलिंग में निवेश किया जाता है, जो कि अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। ऐप्पल को इस घोषणा से सबसे बड़ा झटका लगेगा क्योंकि वह भारत में अपने 88 प्रतिशत फोन का आयात करते हैं। नई नीति रिलायंस जियो और अन्य ऐसे कंपनी पर भी प्रभाव डालती है जो चीन के फीचर फोन के स्रोत के लिए जाने जाते हैं।

आईफोन मॉडल की कीमत में 2,000 से 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है। और ऐप्पल द्वारा हाल ही में भारत में रिटेलर मार्जिन काटा जा रहा है, इसलिए विक्रेताओं के लिए बढ़ती कीमतों को स्वीकार करना कठिन होगा।

स्मार्टफोन के अलावा, आयातित टीवी पर शुल्क में भी 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मेक इन इंडिया योजना के तहत अन्य क्षेत्रों जैसे जैव प्रौद्योगिकी, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग, लैदर, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, रत्न और आभूषण, कंस्ट्रक्शन, शिपिंग और रेलवे पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार 5G अपनाने को भी बढ़ावा देगी और वैश्विक बाजारों के अनुरूप 2020 में एक वैश्विक स्तर की योजना तैयार करेगी।

इंडस्ट्री के विचार

सरकार द्वारा उठाये इस कदम को अभी स्मार्टफोन इंडस्ट्री से मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। वनप्लस के महाप्रबंधक विकास अग्रवाल ने वित्त मंत्री द्वारा सीमा शुल्क में वृद्धि की घोषणा का स्वागत किया है।

“मेक इन इंडिया प्रोग्राम की 3 साल पहले की गयी घोषणा के बाद से, देश में बिक चुके 85% से अधिक स्मार्टफोन अब स्थानीय रूप से उत्पादित किए गए हैं। इसलिए, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने के लिए नए नियमों को लागू करने के लिए यह उपयुक्त समय है। वनप्लस में, हम पूरी तरह से भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध हैं और प्रस्तावित नियमों का स्वागत करते हैं। वर्तमान में, सभी वनप्लस स्मार्टफ़ोन स्थानीय रूप से तैयार किए जाते हैं और हम पहले से ही स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़ाने के तरीकों की तलाश कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ग्राहक पर किसी भी प्रकार के नए नियमों का न्यूनतम मूल्य प्रभाव पड़े। “

 

अजय मेहता, वाइस-प्रेजिडेंट इंडिया, एचएमडी ग्लोबल ने भी अतिरिक्त सीमा शुल्क के बोझ के प्रति अपनी शांत प्रतिक्रिया दी।

“एचएमडी ग्लोबल ने प्रधान मंत्री मोदी के मेक इन इंडिया अभियान पर अपना मजबूत जोर दिया है। मोबाइल फोन के आयात शुल्क में 20% की बढ़ोतरी, साथ ही मुख्य कंपोनेंट्स पर 15% शुल्क के साथ, इसका हमारे व्यापार पर न्यूनतम प्रभाव होगा, क्योंकि हमारे सभी नोकिया फोन के वर्तमान पोर्टफोलियो भारत में निर्मित होते हैं। “

 

संजीव अग्रवाल, मुख्य विनिर्माण अधिकारी, लावा इंटरनेशनल इस कदम के प्रति काफी आशावादी है।

“हम केंद्रीय बजट 2018-19 में मोबाइल फोन में कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से 20 फीसदी तक बढ़ने की घोषणा का स्वागत करते हैं। यह सरकार द्वारा मेक-इन-इंडिया अभियान को बढ़ावा देगा और मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत को एक वैश्विक केंद्र बनाने की हमारे देश के उद्देश्य को प्राप्त करने में सहायक होगा। स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार के अवसरों को और अधिक बढ़ाएगा, युवाओं को लाभान्वित करेगा और अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में योगदान करेगा। मैं इस ऐतिहासिक निर्णय पर सरकार को बधाई देता हूं।”

 

दूसरी ओर, कूलपैड इंडिया के सीईओ श्री सैयद ताजुद्दीन इस कदम से खुश नहीं है।

“यह बजट काफी मिश्रित चीजों के साथ पेश किया गया है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कोई खास योजना या कदम नहीं उठाया गया है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कुछ वास्तव में सकारात्मक खबरें हैं, लेकिन मोबाइल हेंडसेट इंडस्ट्री के लिए कोई खास संकेत नहीं दिया गया है। 15% से 20% तक कस्टम शुल्क में वृद्धि निश्चित रूप से को हैंडसेट की उपलब्ध कीमत पर असर करेगी, खासकर जब प्रीमियम हेंडसेट्स के लिए मरम्मत की बात आती है। हैंडसेट्स पर कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी, ब्रांडों को भारत में अधिक मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए बाध्य करेगी, लेकिन स्पेयर पार्ट्स बनाने के लिए स्थानीय ईको-सिस्टम का अच्छा सपोर्ट नहीं है। स्थानीय स्पेयर पार्ट निर्माताओं की यह कमी मोबाइल हैंडसेट ब्रांडों के लिए कठिन परिस्थिति होगी। इसलिए एक ब्रांड को अधिकतर स्पेयर पार्ट्स आयात करने के लिए मजबूर किया जाता है और ग्राहकों को इसलिए अधिक कीमत के रूप में इसका कुछ बोझ उठाना पड़ता है।”

 

 

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